विशेष लोक अदालत में 28 प्रकरणों का निराकरण, 92.36 लाख का अवार्ड पारित
विशेष लोक अदालत में 28 प्रकरणों का निराकरण, 92.36 लाख का अवार्ड पारित
छत्तीसगढ़ संवाददाता
कोण्डागांव, 20 जुलाई। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला न्यायालय कोण्डागांव में धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (चेक अनादरण) से संबंधित प्रकरणों के निराकरण के लिए स्पेशल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान आपसी समझौते के माध्यम से 28 प्रकरणों का निराकरण करते हुए 92 लाख 36 हजार 497 रुपये का अवार्ड पारित किया गया।
स्पेशल लोक अदालत का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने वर्चुअल माध्यम से किया। इसके बाद जिला न्यायालय परिसर कोण्डागांव में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष खिलावन राम रिगरी ने मां सरस्वती और महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि स्पेशल लोक अदालत का उद्देश्य चेक अनादरण से जुड़े लंबित मामलों का आपसी सहमति और समझौते के माध्यम से त्वरित एवं स्थायी समाधान करना है। लोक अदालत में पक्षकारों को सरल और सौहार्दपूर्ण वातावरण में अपने विवादों का समाधान करने का अवसर मिलता है। न्यायिक अधिकारियों ने पक्षकारों को आपसी संवाद और विश्वास के माध्यम से प्रकरणों का निराकरण करने के लिए प्रेरित किया।
स्पेशल लोक अदालत के लिए कुल चार खंडपीठों का गठन किया गया था। इसमें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोण्डागांव, अपर जिला एवं सत्र न्यायालय नारायणपुर, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नारायणपुर और न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी केशकाल की खंडपीठ शामिल थीं। इन खंडपीठों में चेक बाउंस के 156 लंबित प्रकरण और 101 प्रीलिटिगेशन प्रकरण रखे गए थे, जिनमें से 28 प्रकरणों का समझौते के आधार पर निराकरण किया गया।
लोक अदालत के दौरान समाधान प्राप्त करने वाले पक्षकारों को न्यायिक अधिकारियों द्वारा काजू, कटहल, नींबू सहित अन्य पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया। पक्षकारों से पौधों का रोपण कर उनकी नियमित देखभाल करने और पर्यावरण संरक्षण अभियान में भागीदारी निभाने की अपील की गई। न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढिय़ों के लिए महत्वपूर्ण धरोहर साबित होगा।
छत्तीसगढ़ संवाददाता
कोण्डागांव, 20 जुलाई। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला न्यायालय कोण्डागांव में धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (चेक अनादरण) से संबंधित प्रकरणों के निराकरण के लिए स्पेशल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान आपसी समझौते के माध्यम से 28 प्रकरणों का निराकरण करते हुए 92 लाख 36 हजार 497 रुपये का अवार्ड पारित किया गया।
स्पेशल लोक अदालत का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने वर्चुअल माध्यम से किया। इसके बाद जिला न्यायालय परिसर कोण्डागांव में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष खिलावन राम रिगरी ने मां सरस्वती और महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि स्पेशल लोक अदालत का उद्देश्य चेक अनादरण से जुड़े लंबित मामलों का आपसी सहमति और समझौते के माध्यम से त्वरित एवं स्थायी समाधान करना है। लोक अदालत में पक्षकारों को सरल और सौहार्दपूर्ण वातावरण में अपने विवादों का समाधान करने का अवसर मिलता है। न्यायिक अधिकारियों ने पक्षकारों को आपसी संवाद और विश्वास के माध्यम से प्रकरणों का निराकरण करने के लिए प्रेरित किया।
स्पेशल लोक अदालत के लिए कुल चार खंडपीठों का गठन किया गया था। इसमें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोण्डागांव, अपर जिला एवं सत्र न्यायालय नारायणपुर, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नारायणपुर और न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी केशकाल की खंडपीठ शामिल थीं। इन खंडपीठों में चेक बाउंस के 156 लंबित प्रकरण और 101 प्रीलिटिगेशन प्रकरण रखे गए थे, जिनमें से 28 प्रकरणों का समझौते के आधार पर निराकरण किया गया।
लोक अदालत के दौरान समाधान प्राप्त करने वाले पक्षकारों को न्यायिक अधिकारियों द्वारा काजू, कटहल, नींबू सहित अन्य पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया। पक्षकारों से पौधों का रोपण कर उनकी नियमित देखभाल करने और पर्यावरण संरक्षण अभियान में भागीदारी निभाने की अपील की गई। न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढिय़ों के लिए महत्वपूर्ण धरोहर साबित होगा।