नक्सल पीडि़त परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों को शासन की योजनाओं से जोडऩे विशेष शिविर, 300 से अधिक लाभांवित

छत्तीसगढ़ संवाददाता कोण्डागांव, 26 जुलाई। नक्सल प्रभावित परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास को गति देने के उद्देश्य से कोण्डागांव पुलिस एवं जिला प्रशासन द्वारा पुलिस लाइन कोण्डागांव में विशेष बहु-विभागीय हितग्राही शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में एक ही छत के नीचे विभिन्न विभागों द्वारा सैकड़ों हितग्राहियों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोडऩे की प्रक्रिया शुरू की गई। यह शिविर कलेक्टर कोण्डागांव नूपुर राशि पन्ना एवं पुलिस अधीक्षक कोण्डागांव पंकज चन्द्रा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में नक्सल पुनर्वास योजना 2025 के तहत आयोजित किया गया। नक्सल पुनर्वास योजना के द्वितीय चरण के तहत जिला बस्तर एवं नारायणपुर के 154 आत्मसमर्पित नक्सली, जो वर्तमान में कोण्डागांव जिले में निवासरत हैं, तथा कोण्डागांव जिले के 150 नक्सल पीडि़त परिवारों को शिविर में शामिल किया गया। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने हितग्राहियों की पात्रता एवं दस्तावेजों का परीक्षण कर योजनाओं में पंजीयन और आवेदन की प्रक्रिया पूरी की। हितग्राहियों के लिए पुलिस लाइन में निशुल्क वाहन, भोजन एवं स्वल्पाहार की व्यवस्था भी की गई थी। शिविर में यह भी सामने आया कि कोण्डागांव जिले के 31 आत्मसमर्पित नक्सलियों का निधन हो चुका है, जिनके परिवारों को अब तक कुछ सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया था। ऐसे परिवारों, विशेषकर मृत आत्मसमर्पित नक्सलियों की पत्नियों को शिविर में बुलाकर मृत्यु प्रमाण-पत्र, विधवा पेंशन सहित अन्य पात्र योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाए गए और संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा हितग्राहियों का पंजीयन कर योजनाओं से जोडऩे की कार्रवाई की गई। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना के 40, आयुष्मान कार्ड के 7, राशन कार्ड के 3, बैंक खाते के 6, छात्रवृत्ति के 10, कौशल विकास प्रशिक्षण के 14, स्वरोजगार एवं पशुपालन के 11, मनरेगा जॉब कार्ड के 27, कृषि पंप एवं कृषि यंत्र अनुदान के 16, वन अधिकार पट्टा के 8, श्रमिक पंजीयन कार्ड के 75, दिव्यांग, विधवा एवं वृद्धावस्था पेंशन के 11, महतारी वंदन योजना के 42 तथा अन्य विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभान्वित करने की प्रक्रिया की गई। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा 63 हितग्राहियों की एनसीडी (गैर संचारी रोग) जांच की गई, उद्यान विभाग द्वारा 200 पौधों का वितरण किया गया। वहीं दिव्यांग सहायक उपकरण, ड्राइविंग लाइसेंस, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, आंगनबाड़ी पंजीयन, विद्यालय गणवेश एवं पाठ्य पुस्तकों सहित अन्य योजनाओं के लिए भी हितग्राहियों को लाभ से जोड़ा गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने कहा कि शासन की मंशा है कि कोई भी पात्र व्यक्ति जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित न रहे। नक्सल प्रभावित परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोडक़र सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। पुलिस अधीक्षक पंकज चन्द्रा ने कहा कि कोण्डागांव पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को शासन की योजनाओं से जोडऩे का कार्य भी कर रही है। आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं नक्सल पीडि़त परिवारों का सम्मानजनक पुनर्वास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना स्थायी शांति एवं विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अविनाश भोई, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चन्द्रा सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी, पुलिस अधिकारी, नक्सल पीडि़त परिवार एवं आत्मसमर्पित नक्सली उपस्थित रहे। शिविर के सफल आयोजन में कोण्डागांव, फरसगांव एवं केशकाल अनुविभाग के पुलिस अधिकारियों तथा नक्सल ऑपरेशन शाखा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

नक्सल पीडि़त परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों को शासन की योजनाओं से जोडऩे विशेष शिविर, 300 से अधिक लाभांवित
छत्तीसगढ़ संवाददाता कोण्डागांव, 26 जुलाई। नक्सल प्रभावित परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास को गति देने के उद्देश्य से कोण्डागांव पुलिस एवं जिला प्रशासन द्वारा पुलिस लाइन कोण्डागांव में विशेष बहु-विभागीय हितग्राही शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में एक ही छत के नीचे विभिन्न विभागों द्वारा सैकड़ों हितग्राहियों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोडऩे की प्रक्रिया शुरू की गई। यह शिविर कलेक्टर कोण्डागांव नूपुर राशि पन्ना एवं पुलिस अधीक्षक कोण्डागांव पंकज चन्द्रा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में नक्सल पुनर्वास योजना 2025 के तहत आयोजित किया गया। नक्सल पुनर्वास योजना के द्वितीय चरण के तहत जिला बस्तर एवं नारायणपुर के 154 आत्मसमर्पित नक्सली, जो वर्तमान में कोण्डागांव जिले में निवासरत हैं, तथा कोण्डागांव जिले के 150 नक्सल पीडि़त परिवारों को शिविर में शामिल किया गया। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने हितग्राहियों की पात्रता एवं दस्तावेजों का परीक्षण कर योजनाओं में पंजीयन और आवेदन की प्रक्रिया पूरी की। हितग्राहियों के लिए पुलिस लाइन में निशुल्क वाहन, भोजन एवं स्वल्पाहार की व्यवस्था भी की गई थी। शिविर में यह भी सामने आया कि कोण्डागांव जिले के 31 आत्मसमर्पित नक्सलियों का निधन हो चुका है, जिनके परिवारों को अब तक कुछ सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया था। ऐसे परिवारों, विशेषकर मृत आत्मसमर्पित नक्सलियों की पत्नियों को शिविर में बुलाकर मृत्यु प्रमाण-पत्र, विधवा पेंशन सहित अन्य पात्र योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाए गए और संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा हितग्राहियों का पंजीयन कर योजनाओं से जोडऩे की कार्रवाई की गई। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना के 40, आयुष्मान कार्ड के 7, राशन कार्ड के 3, बैंक खाते के 6, छात्रवृत्ति के 10, कौशल विकास प्रशिक्षण के 14, स्वरोजगार एवं पशुपालन के 11, मनरेगा जॉब कार्ड के 27, कृषि पंप एवं कृषि यंत्र अनुदान के 16, वन अधिकार पट्टा के 8, श्रमिक पंजीयन कार्ड के 75, दिव्यांग, विधवा एवं वृद्धावस्था पेंशन के 11, महतारी वंदन योजना के 42 तथा अन्य विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभान्वित करने की प्रक्रिया की गई। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा 63 हितग्राहियों की एनसीडी (गैर संचारी रोग) जांच की गई, उद्यान विभाग द्वारा 200 पौधों का वितरण किया गया। वहीं दिव्यांग सहायक उपकरण, ड्राइविंग लाइसेंस, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, आंगनबाड़ी पंजीयन, विद्यालय गणवेश एवं पाठ्य पुस्तकों सहित अन्य योजनाओं के लिए भी हितग्राहियों को लाभ से जोड़ा गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने कहा कि शासन की मंशा है कि कोई भी पात्र व्यक्ति जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित न रहे। नक्सल प्रभावित परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोडक़र सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। पुलिस अधीक्षक पंकज चन्द्रा ने कहा कि कोण्डागांव पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को शासन की योजनाओं से जोडऩे का कार्य भी कर रही है। आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं नक्सल पीडि़त परिवारों का सम्मानजनक पुनर्वास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना स्थायी शांति एवं विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अविनाश भोई, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चन्द्रा सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी, पुलिस अधिकारी, नक्सल पीडि़त परिवार एवं आत्मसमर्पित नक्सली उपस्थित रहे। शिविर के सफल आयोजन में कोण्डागांव, फरसगांव एवं केशकाल अनुविभाग के पुलिस अधिकारियों तथा नक्सल ऑपरेशन शाखा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।