छत्तीसगढ़ संवाददाता
कोंडागांव, 2 अगस्त। गुरु पूर्णिमा पर शासकीय गुण्डाधुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोंडागांव में गुरु पूजन एवं व्याख्यान का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं महर्षि वेदव्यास के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापकगण, अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम ने की। उन्होंने गुरु की महत्ता, दायित्व एवं कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु केवल ज्ञान का संचार ही नहीं करता, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र एवं नैतिक मूल्यों का निर्माण भी करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान प्रदान किया गया है, क्योंकि गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के प्रति सम्मान, अनुशासन एवं समर्पण की भावना विकसित करने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता डॉ. शशिभूषण कन्नौजे, सहायक प्राध्यापक (वनस्पति शास्त्र) एवं जिला संगठक, राष्ट्रीय सेवा योजना, कोंडागांव एवं नारायणपुर ने महर्षि वेदव्यास के जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि महर्षि वेदव्यास भारतीय ज्ञान परंपरा के महान ऋषि थे, जिन्होंने वेदों का संकलन एवं विभाजन कर उन्हें व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया। उन्होंने महाभारत, पुराणों एवं ब्रह्मसूत्र की रचना के माध्यम से भारतीय संस्कृति और दर्शन को अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने वेद एवं वेदांत की अवधारणा को सरल भाषा में समझाते हुए विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुडऩे तथा नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में डॉ. अलका शुक्ला ने गुरु की महिमा पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु जीवन का पथ-प्रदर्शक होता है। गुरु के मार्गदर्शन से ही व्यक्ति ज्ञान, संस्कार, विवेक एवं सफलता प्राप्त करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने गुरुजनों के प्रति सदैव श्रद्धा एवं सम्मान बनाए रखने का आग्रह किया।
अर्जुन सिंह नेताम ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर व्याख्यान देते हुए भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा की गौरवशाली विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, अनुशासन एवं आत्मविकास का प्रेरणादायी उत्सव है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने गुरुजनों का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को जीवन में सदाचार, अनुशासन, सेवा, समर्पण एवं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण, तकनीशियन, परिचारक, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का वातावरण श्रद्धा, भक्ति एवं ज्ञानवर्धक विचारों से ओतप्रोत रहा। अंत में सभी ने महर्षि वेदव्यास के आदर्शों एवं गुरु-शिष्य परंपरा को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।
छत्तीसगढ़ संवाददाता
कोंडागांव, 2 अगस्त। गुरु पूर्णिमा पर शासकीय गुण्डाधुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोंडागांव में गुरु पूजन एवं व्याख्यान का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं महर्षि वेदव्यास के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापकगण, अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम ने की। उन्होंने गुरु की महत्ता, दायित्व एवं कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु केवल ज्ञान का संचार ही नहीं करता, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र एवं नैतिक मूल्यों का निर्माण भी करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान प्रदान किया गया है, क्योंकि गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के प्रति सम्मान, अनुशासन एवं समर्पण की भावना विकसित करने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता डॉ. शशिभूषण कन्नौजे, सहायक प्राध्यापक (वनस्पति शास्त्र) एवं जिला संगठक, राष्ट्रीय सेवा योजना, कोंडागांव एवं नारायणपुर ने महर्षि वेदव्यास के जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि महर्षि वेदव्यास भारतीय ज्ञान परंपरा के महान ऋषि थे, जिन्होंने वेदों का संकलन एवं विभाजन कर उन्हें व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया। उन्होंने महाभारत, पुराणों एवं ब्रह्मसूत्र की रचना के माध्यम से भारतीय संस्कृति और दर्शन को अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने वेद एवं वेदांत की अवधारणा को सरल भाषा में समझाते हुए विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुडऩे तथा नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में डॉ. अलका शुक्ला ने गुरु की महिमा पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु जीवन का पथ-प्रदर्शक होता है। गुरु के मार्गदर्शन से ही व्यक्ति ज्ञान, संस्कार, विवेक एवं सफलता प्राप्त करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने गुरुजनों के प्रति सदैव श्रद्धा एवं सम्मान बनाए रखने का आग्रह किया।
अर्जुन सिंह नेताम ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर व्याख्यान देते हुए भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा की गौरवशाली विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, अनुशासन एवं आत्मविकास का प्रेरणादायी उत्सव है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने गुरुजनों का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को जीवन में सदाचार, अनुशासन, सेवा, समर्पण एवं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण, तकनीशियन, परिचारक, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का वातावरण श्रद्धा, भक्ति एवं ज्ञानवर्धक विचारों से ओतप्रोत रहा। अंत में सभी ने महर्षि वेदव्यास के आदर्शों एवं गुरु-शिष्य परंपरा को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।